द जनमित्र डेस्क
हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में शामिल मकर संक्रांति अब बस कुछ ही दिनों दूर है। इस वर्ष यह पावन पर्व 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को मनाया जाएगा, जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। यह उत्तरायण का प्रारंभ माना जाता है, जो शुभ कार्यों और स्नान-दान के लिए विशेष महत्व रखता है।

रामरेखा घाट के वरिष्ठ पुजारी लाला बाबा ने बताया कि पौष मास में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही यह त्योहार मनाया जाता है। बक्सर के अति प्राचीन और पौराणिक रामरेखा घाट पर मकर संक्रांति के दिन सबसे अधिक भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु 13 जनवरी से ही यहां जुटना शुरू कर देते हैं और 14 जनवरी को हजारों-लाखों की संख्या में गंगा में उत्तरायणी स्नान करते हैं। अलसुबह से शाम तक गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा-अर्चना का सिलसिला निर्बाध चलता रहता है।
मकर संक्रांति में महज चार दिन शेष रह गए हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने शनिवार को रामरेखा घाट का दौरा कर हालात का जायजा लिया। पड़ताल में घाट और पहुंच पथ की जो स्थिति सामने आई, वह चिंताजनक है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन के मद्देनजर यहां भारी भीड़ की संभावना है, लेकिन घाट की सीढ़ियों पर सैकड़ों की संख्या में पंडों द्वारा लगाई गई चौकियां श्रद्धालुओं के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती हैं।
घाट पर पहले से ही पैर रखने तक की जगह नहीं बच पाती है। ऐसे में इन चौकियों के कारण गंगा तट तक पहुंचना और स्नान करना कठिन हो सकता है। श्रद्धालुओं को कसरत करनी पड़ सकती है। प्रशासन से अपील है कि भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और पहुंच पथ को सुगम बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि कोई असुविधा न हो।
यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सूर्य की कृपा, नई फसल और समृद्धि का भी संदेश देता है। बक्सरवासी और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु इस बार भी रामरेखा घाट पर अपनी श्रद्धा की डुबकी लगाने को बेताब हैं। प्रशासन की ओर से उचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की उम्मीद की जा रही है।


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