राजनीति

विश्वामित्र सेना ने उठाई सांस्कृतिक पहचान दुरूस्त करने की माँग

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द जनमित्र डेस्क

जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को दुरुस्त करने की मुहिम रंग ला रही है। विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सह-संयोजक राजकुमार चौबे के नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल अब जोर पकड़ रही है। शायद 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले उठी मांग का ही असर है कि एनडीए सरकार ने बक्सर को विश्वामित्र पार्क की सौगात दी है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह महज चुनावी सौगात नहीं, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विश्वामित्र कॉरिडोर के निर्माण की जरूरत है।

लोगों का मानना है कि अगर राम के नाम पर सत्ता हासिल करने वाले राजनेताओं ने बक्सर के विकास के लिए प्रयास किए होते, तो आज यह जिला उपेक्षित न होता। विश्वामित्र सेना के अध्यक्ष राजकुमार चौबे ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “अयोध्या में राम मंदिर के लिए 1800 करोड़ रुपये खर्च किए गए, सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में 882.87 करोड़ की लागत से जानकी मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है। लेकिन बक्सर, जहां भगवान राम ने महर्षि विश्वामित्र से शिक्षा प्राप्त कर ताड़िका राक्षसी का वध किया और पराक्रमी राम कहलाए, उस शिक्षा स्थली की उपेक्षा क्यों?”

विश्वामित्र सेना बक्सर में विश्वामित्र कॉरिडोर के निर्माण की मांग को लेकर लगातार मुहिम चला रही है। चौबे ने कहा कि कॉरिडोर के निर्माण से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। विश्वामित्र पार्क की घोषणा पर जिले वासियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि पहले के जनप्रतिनिधि बाहरी थे, उन्हें बक्सर की सांस्कृतिक विरासत से कोई सरोकार नहीं था। वे सिर्फ लूट-खसोट में लगे रहे। विश्वामित्र सेना इस लड़ाई को जारी रखेगी ताकि बक्सर की पहचान वैश्विक स्तर पर स्थापित हो और स्थानीय लोगों को रोजगार मिले। उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वामित्र पार्क सिर्फ एक शुरुआत है। जिले के विकास के लिए अभी कई मांगें पूरी होनी बाकी हैं।

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