द जनमित्र | शशि
डुमराँव विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने जीविका दीदियों के साथ संवाद में उनकी समस्याओं को सुना। छह पंचायतों की जीविका दीदियों और कैडरों ने हिस्सा लिया। विधायक ने कहा कि बिहार की 1.50 लाख जीविका कैडरों और दीदियों को आत्मनिर्भर बनाने में जीविका मिशन की भूमिका अहम है, पर सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने विधानसभा में जीविका कैडरों को बेसिक कैडर घोषित करने और सम्मानजनक मानदेय की मांग उठाई, पर कोई प्रगति नहीं हुई।




उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा-जदयू सरकार ‘महिला संवाद’ के नाम पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च कर चुनावी प्रचार कर रही है, जबकि जीविका दीदियों को उचित मानदेय नहीं मिलता। सरकारी योजनाओं का लाभ गरीबों तक नहीं पहुँच रहा। योजनाओं की जानकारी के अभाव में लोग वंचित रहते हैं, और अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। जीविका दीदियों के प्रशिक्षण का मुद्दा भी उठाया गया, पर प्रशिक्षण के बजाय अधिकारियों ने धन का दुरुपयोग किया।
‘महिला संवाद’ में दीदियों को अपनी समस्याएँ उठाने से रोका गया, जो सरकारी तंत्र के जरिए जनता को भ्रमित करने का प्रयास है। विधायक ने ‘विकसित भारत’ अभियान की तरह इसे चुनावी प्रचार बताया, जिसमें करोड़ों रुपये खर्च हुए, पर जनता को लाभ नहीं मिला। सरकार विश्व बैंक से कर्ज लेकर परियोजनाएँ चला रही है, फिर ‘महिला संवाद’ पर इतना खर्च कहाँ से? यह सरकार का महिमामंडन और भ्रष्टाचार का खेल है।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार चरम पर है। जागरूकता की बात करने वाले अधिकारी ही भ्रष्टाचार में डूबे हैं। सरकारी दफ्तरों में बिना रिश्वत काम नहीं होता। यह कैसी जागरूकता, जब सिस्टम ही भ्रष्ट है? सरकार को जीविका दीदियों की माँगें पूरी करनी चाहिए, न कि दिखावटी कार्यक्रमों पर धन लुटाना चाहिए।

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