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नियोजित शिक्षकों की सेवा शर्त को विपक्ष ने बताया चुनावी जुमला..

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जनमित्र/पटना: बिहार सरकार की कैबिनेट बैठक में नियोजित शिक्षकों की सेवा शर्त नियमावली को मंजूरी मिल गई है. इस मांग को लेकर शिक्षक कर्मियों ने कई बार हड़ताल भी किए थे लेकिन चुनाव से ठीक पहले नीतीश सरकार ने सेवा शर्त लागू करने का फैसला किया है जिसमें कुल 28 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है. बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लिए गए इस बड़े निर्णय को विपक्ष द्वारा इसे चुनावी लॉलीपॉप बताया जा रहा है. रालोसपा के प्रदेश महासचिव धीरज सिंह कुशवाहा का कहना है कि सरकार ने चुनावी लॉलीपॉप देकर शिक्षकों के साथ छलावा किया है यही नीतिश सरकार ने कई बार शिक्षकों

पर लाठीचार्ज करा कर उनके अस्मिता से खेला है और चुनाव नजदीक देखकर यह फैसला लिया गया है अगर इन्हें शिक्षकों की इतना ही चिंता थी तो यह निर्णय पहले ही लिया जाना चाहिए था साथ ही जदयू नेता तथा वर्तमान सरकार में उद्योग मंत्री रहे श्याम रजक के पार्टी छोड़कर राजद में शामिल होने पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि श्याम रजक के जदयू छोड़कर महागठबंधन में शामिल होने से यह स्पष्ट हो गया कि जदयू में सामाजिक न्याय का गला घोंटा जा रहा है. नीतीश कुमार को बिहार की जनता से कोई लेना देना नहीं है. बिहार कोरोना महामारी एवं बाढ़ की दोहरी मार झेल रहा है और मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी बचाने के चक्कर में लगे हुए हैं. ऐसे में बिहार की जनता भगवान भरोसे ही है.

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