जनमित्र/बक्सर : रेडक्रॉस सोसाइटी के सभागार में साहित्यकार कुमार नयन की रचनाओं पर केंद्रित साहित्यिक पत्रिका देशज के विशेषांक का विमोचन हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता पेंशनर समाज के संरक्षक गणेश उपाध्याय ने की. जिलाधिकारी राघवेंद्र सिंह और देशज के संपादक अरूण शीतांश को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया.

कार्यक्रम में जिलाधिकारी राघवेंद्र सिंह ने कहा कि यह दौर काफी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. इस रफ्तार ने एक दूसरे को अलग-थलग कर रखा है. लोग संवेदनहीन होते जा रहे हैं. जबकि साहित्य मानवीय संवेदना को जिंदा रखता है. उन्होंने कहा कि आप समाज के किसी एक विषय पर सोच कर थोड़ा काम कर सकते हैं, लेकिन जब आप साहित्य के नजरिये से देखियेगा तो उसका सरोकार आपको व्यापकता प्रदान करता है. उन्होंने कहा कि हमारा स्टेट एक वेलफेयर स्टेट है और साहित्य इस सोच को हमेशा जिंदा रखता है.

जिलाधिकारी ने कुमार नयन के विशेषांक पर चर्चा करते हुए कहा कि इसकी कहानी, कविता और गजले मानवीय दृष्टिकोण प्रदान करते हैं, जिसे हर किसी को पढ़ना चाहिए. देशज के संपादक अरूण शीतांश ने कहा कि जब कभी बक्सर की पहचान की बात होगी तो उसमें कुमार नयन को भी याद किया जायेगा. इनके बिना इस शहर की पहचान अधुरी है. मंच संचालन के दौरान समीक्षक डा. दीपक कुमार राय ने कहा कि साहित्य दुनिया को बेहतर बनाने का एक जरिया है.

कुमार नयन की रचनाएं आम पाठकों की मन की बात होती है. इसलिए कुमार नयन सबसे ज्यादा पढे जाने वाले साहित्यकार हैं. इस अवसर पर रेडक्रॉस सासाइटी के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार सिंह, पूर्व चेयरमैन मीना सिंह, प्रलेश के प्रवीण कुमार, वरीय अधिवक्ता रामेश्वर प्रसाद वर्मा, कवि लक्ष्मीकांत मुकुल, शिव बहादुर प्रीतम, राम मुरारी, कवि शशांक शेखर, कवयित्री वंदना राय, प्रवीण कुमार, राजेश शर्मा समेत अन्य मौजूद थे.




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