द जनमित्र डेस्क
मोहनिया-चौसा-बक्सर राष्ट्रीय राजमार्ग-319ए के चौसा-बक्सर फोरलेन बाईपास हिस्से की प्रगति कछुआ चाल से हो रही है। निर्माण एजेंसी को मार्च 2024 में लेटर ऑफ अवार्ड मिला था और 24 महीने में काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था। इस हिसाब से मार्च 2026 तक सड़क तैयार हो जानी चाहिए थी, लेकिन अभी तक कुछ जगहों पर सिर्फ सीमांकन और मिट्टी का काम ही हो पाया है।
मौजूदा रफ्तार देखें तो परियोजना को पूरा होने में दो से ढाई साल और लग सकते हैं। दो साल में खत्म होने वाली यह योजना खुद दो साल देरी से शुरू हुई और उसके बाद भी काम बहुत धीरे चल रहा है। करीब 20.92 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड फोरलेन बाईपास पर कुल 1060.16 करोड़ रुपये खर्च होने हैं।

इस बाईपास का मकसद बक्सर शहर से भारी वाहनों को बाहर निकालना और शहर के अंदर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना है। लेकिन लगातार हो रही देरी का सीधा असर शहर की यातायात व्यवस्था, व्यापार और औद्योगिक विकास पर पड़ रहा है।
बक्सर शहर से गुजरने वाला पुराना बाईपास अब बाहरी मार्ग नहीं रह गया। समय के साथ उसके दोनों तरफ घनी आबादी बस गई और वह शहर की आम सड़क बन चुका है। इसलिए दिन के समय भारी व्यावसायिक वाहनों पर पाबंदी लगानी पड़ी। ट्रक और कंटेनरों को घंटों नो-एंट्री खुलने का इंतजार करना पड़ता है। मेले, त्योहार और खास मौकों पर यह समस्या और बढ़ जाती है। इसी पुरानी समस्या को दूर करने के लिए चौसा से बक्सर तक नए फोरलेन ग्रीनफील्ड बाईपास की योजना बनी थी।
मोहनिया से बक्सर तक राष्ट्रीय राजमार्ग-319ए को दो चरणों में विकसित करने का फैसला लिया गया। पहले चरण में मोहनिया से चौसा तक करीब 45 किलोमीटर सड़क दो लेन पेव्ड शोल्डर के साथ बनाई गई, जो पूरा हो चुका है। दूसरे चरण में चौसा से बक्सर तक 20.92 किलोमीटर लंबा चार लेन ग्रीनफील्ड बाईपास बनना है, जो अभी देरी का शिकार है। काम की सुस्त गति का सबसे बड़ा कारण कई जगहों पर लंबित भू-अर्जन बताया जा रहा है। जब तक पूरी जमीन निर्माण एजेंसी को नहीं मिलेगी, तब तक लगातार काम चलना मुश्किल है। इसलिए कहीं-कहीं मशीनें नजर आती हैं, लेकिन पूरी परियोजना पर एक साथ काम नहीं हो पा रहा।
यह फोरलेन बाईपास उत्तर प्रदेश के भरौली-ऊंचाडीह फोरलेन लिंक रोड और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा। इससे बक्सर, मोहनिया, जीटी रोड, एनएच-922 और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के बीच सीधा संपर्क बनेगा। वाराणसी, लखनऊ और दिल्ली की तरफ यात्रा समय घटेगा और व्यापारिक परिवहन को भी नई रफ्तार मिलेगी। तकनीकी रूप से यह पूरी तरह नए एलाइनमेंट पर आधारित ग्रीनफील्ड परियोजना है। इसमें चार लेन विभाजित कैरिजवे, आधुनिक मीडियन, ओवरब्रिज, व्हीकुलर अंडरपास और आरसीसी ड्रेनेज का प्रावधान है। पौधरोपण, हाईवे साइनेज और भारी वाहनों के अनुकूल उच्च मानक की पेवमेंट तकनीक भी शामिल की गई है, ताकि तेज, सुरक्षित और निर्बाध यातायात सुनिश्चित हो।
परियोजना की महत्वपूर्ण तिथियां पर नजर डालें तो 21 सितंबर 2022 को 1060.16 करोड़ रुपये की स्वीकृति की घोषणा हुई। 14 सितंबर 2023 को ईपीसी निर्माण कार्य की निविदा जारी की गई और 11 मार्च 2024 को लेटर ऑफ अवार्ड मिला। परियोजना एक नजर में देखें तो एनएच-319ए चौसा-बक्सर फोरलेन बाईपास पैकेज-2 की कुल लंबाई 20.92 किलोमीटर है। यह चार लेन ग्रीनफील्ड बाईपास है, जिसकी कुल स्वीकृत लागत 1060.16 करोड़ और अनुमानित ईपीसी निर्माण लागत 632.45 करोड़ रुपये है। पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता तुलसी प्रसाद ने बताया कि इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। सरकार इसे समयबद्ध तरीके से जल्द पूरा कराने की कोशिश कर रही है और निर्माण में आने वाली हर बाधा को दूर किया जा रहा है।

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