द जनमित्र डेस्क
पटना। बिहार सरकार ने राज्य की यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने और क्षेत्रीय जुड़ाव को मजबूत करने के उद्देश्य से चार प्रमुख रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) गलियारों को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। हालांकि इस महत्वाकांक्षी योजना में बक्सर को पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने से स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी फैल गई है।
दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग, प्रयागराज-हल्दिया नेशनल वाटर वे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जैसी रणनीतिक सुविधाओं से जुड़े होने के बावजूद बक्सर की इस उपेक्षा ने आरा-बक्सर के बीच की घनी आबादी को निराश किया है।

आरआरटीएस परियोजना के तहत पटना से बेगूसराय 121 किलोमीटर, मुजफ्फरपुर 87 किलोमीटर और गया 92 किलोमीटर की दूरी पर हैं, जबकि पटना से बक्सर महज 118 किलोमीटर दूर है। इसके बावजूद बक्सर को जगह नहीं दी गई।
बक्सर पश्चिमी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाला एक प्रमुख ट्रांजिट हब माना जाता है। यहां से रोजाना हजारों लोग पटना की ओर रोजगार, पढ़ाई और इलाज के लिए यात्रा करते हैं। दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेल लाइन पर बक्सर-मोकामा-किउल-झाझा वाला हिस्सा देश के सबसे व्यस्त रेलखंडों में शुमार है।
स्थानीय यात्री बताते हैं कि लोकल ट्रेनों की अनियमितता और धीमी रफ्तार के कारण उन्हें मजबूरन लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों के स्लीपर और एसी कोचों में चढ़ना पड़ता है। इससे हर रोज भीड़भाड़, धक्का-मुक्की और तनावपूर्ण विवाद की स्थिति पैदा होती है।
हालांकि हालिया वर्षों में बक्सर पर केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान बढ़ा है। गाजीपुर-बक्सर लिंक के रूप में 17 किलोमीटर लंबी फोरलेन एलिवेटेड सड़क, कोइलवर से बक्सर तक बनने वाला विश्वामित्र पथ एक्सप्रेसवे (जो पटना के जेपी गंगा पथ से जुड़ेगा) और प्रस्तावित बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे इसके उदाहरण हैं।
स्थानीय लोगों की मांग है कि पटना-आरा आरआरटीएस कॉरिडोर को बक्सर तक विस्तारित करने की व्यवहार्यता का आकलन विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में ही शामिल किया जाए।
युवा सामाजिक कार्यकर्ता शैलेश कुमार ओझा ने कहा कि बक्सर को योजना से बाहर रखने का पूरा पश्चिमी बिहार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। तरुण चौबे ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से इस मुद्दे पर आवाज उठाने की अपील की। सुनील सिद्धार्थ और उमाशंकर पांडेय ने इसे जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी बताया। सोनू सिंह ब्रह्मपुरी ने इसे बक्सर के साथ “सौतेला व्यवहार” करार दिया, जबकि नीतेश कुमार ने बक्सर से किउल तक के खंड को शामिल करने की वकालत की। बक्सरवासी अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार उनकी मांगों पर गौर कर आरआरटीएस परियोजना में इस क्षेत्र को भी शामिल करेगी।

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