द जनमित्र डेस्क
बक्सर। बक्सर की पारंपरिक पापड़ी मिठाई को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग दिलाने की लंबे समय से चली आ रही मांग अब नई रफ्तार पकड़ रही है। इसी कड़ी में विश्वामित्र सेना ने शुक्रवार को बक्सर रेलवे स्टेशन पर प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर इस मुद्दे को पूरे जोर-शोर से उठाया।

संगठन के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने कहा कि पापड़ी मिठाई बक्सर की सदियों पुरानी सांस्कृतिक धरोहर और स्थानीय पहचान का प्रतीक है। इसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर उचित सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि जिस तरह भगवान राम, महर्षि विश्वामित्र और भगवान वामन से जुड़े धार्मिक-ऐतिहासिक महत्व ने बक्सर को विशेष स्थान दिलाया है, उसी तरह यहां की अनोखी पापड़ी भी इस भूमि की विरासत का अभिन्न हिस्सा है।
चौबे ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने इस अनमोल धरोहर को संरक्षित करने और जीआई टैग दिलाने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए। उन्होंने कहा, “अगर समय पर ध्यान दिया जाता तो आज बक्सर की पापड़ी पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना चुकी होती।”
विश्वामित्र सेना ने साफ संकेत दिया है कि वह इस अभियान को लगातार जारी रखेगी। राजकुमार चौबे ने घोषणा की कि जब तक बक्सर की पापड़ी को जीआई टैग नहीं मिल जाता, संगठन शांत नहीं बैठेगा।
उन्होंने फायदों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जीआई टैग मिलने से मिठाई को कानूनी सुरक्षा मिलेगी, जिससे स्थानीय कारीगरों, दुकानदारों और छोटे व्यापारियों की आय बढ़ेगी। साथ ही बक्सर का नाम देश-दुनिया में एक नए ब्रांड के रूप में स्थापित होगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के समापन पर विश्वामित्र सेना के कार्यकर्ताओं ने रेलवे स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों और स्थानीय नागरिकों के बीच पापड़ी मिठाई बांटी। इस दौरान लोगों को बताया गया कि यह सिर्फ एक स्वादिष्ट मिठाई नहीं, बल्कि बक्सर की सांस्कृतिक विरासत है, जिसके संरक्षण के लिए हर स्तर पर सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
कार्यक्रम में संगठन के कई पदाधिकारी और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। विश्वामित्र सेना का यह प्रयास बक्सर की पारंपरिक पहचानों को नई ऊर्जा और पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


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