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एनर्जी ड्रिंक्स युवाओं को बना रही हैं बीमारः सांसद

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द जनमित्र डेस्क

लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर देशभर में एनर्जी ड्रिंक्स के बढ़ते चलन पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य पर पड़ रहे इसके हानिकारक प्रभावों को लेकर तुरंत ध्यान देने की अपील की।

सांसद ने पत्र में लिखा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़, सोशल मीडिया का लगातार दबाव और हर समय ‘एनर्जेटिक’ दिखने की मजबूरी युवाओं को इन पेय पदार्थों की ओर खींच रही है। उन्होंने सस्ते और महंगे दोनों तरह के एनर्जी ड्रिंक्स का जिक्र करते हुए कहा कि कीमत भले ही अलग-अलग हो, लेकिन इनके सेवन से स्वास्थ्य को पहुंचने वाला नुकसान एक समान है।

सुधाकर सिंह ने बताया कि स्टिंग, रेड बुल समेत कई ब्रांड्स युवाओं के बीच खूब लोकप्रिय हो रहे हैं। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवा सस्ते विकल्पों की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। लेकिन उन्होंने साफ चेतावनी दी कि सस्ता होना इन उत्पादों को सुरक्षित नहीं बना देता।

ये ड्रिंक्स शरीर में असली ताकत नहीं भरते, बल्कि सिर्फ अस्थायी उत्तेजना पैदा करते हैं। सांसद ने इनमें मौजूद कैफीन, अत्यधिक चीनी, टॉरिन, गुआराना और जिनसेंग जैसे तत्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके ज्यादा सेवन से हृदय गति बढ़ना, ब्लड प्रेशर का बढ़ना, नींद न आना, चिड़चिड़ापन, मोटापा और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

खाली पेट या शराब के साथ इनका सेवन और भी खतरनाक साबित हो रहा है।

सांसद ने अपने पत्र में यह भी कहा कि शुरुआत में युवाओं को ऊर्जा और उत्साह का एहसास होता है, लेकिन कुछ समय बाद इसका उल्टा असर दिखने लगता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली ऊर्जा बोतलबंद पेय से नहीं, बल्कि अच्छी नींद, पौष्टिक भोजन और नियमित व्यायाम से ही मिलती है।

सुधाकर सिंह ने केंद्र सरकार से चार प्रमुख मांगें की हैं। इनमें एनर्जी ड्रिंक्स पर सख्त कानूनी प्रावधान लागू करना, उनके विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाना, स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाना और इन पेयों में कैफीन व शुगर की अधिकतम सीमा तय करना शामिल है।

सांसद का यह पत्र ऐसे वक्त में आया है जब युवाओं में एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन तेजी से बढ़ रहा है और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इसके दीर्घकालिक नुकसान को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

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