द जनमित्र डेस्क
जिले के परिषद सदस्यों द्वारा शुरू किया गया लंबा प्रदर्शन शनिवार को भी बिना रुके चलता रहा। इस आंदोलन की अगुवाई जिला परिषद सदस्य राजू यादव ने की, जबकि संचालन का जिम्मा केदार यादव संभाल रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के बढ़ते समर्थन से यह विरोध अब और व्यापक रूप लेता जा रहा है।
शनिवार को पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा धरना स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से एकजुटता जताई। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह आंदोलन बिहार की पंचायती राज व्यवस्था की असली तस्वीर उजागर कर रहा है। कुशवाहा ने बताया कि संविधान के 73वें संशोधन और बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 में जिला परिषद को जिला स्तर की सबसे ऊंची इकाई माना गया है, लेकिन हकीकत में इसकी हैसियत काफी कमजोर कर दी गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिला परिषद को महज एक ‘रबर स्टांप’ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। बैठकों में ग्रामीण सड़कों, नालियों, सामुदायिक भवनों और सिंचाई योजनाओं को मंजूरी तो मिल जाती है, लेकिन इनके अमल में महीनों लग जाते हैं। प्रशासन अक्सर ‘तकनीकी मंजूरी लंबित’ या ‘धन की कमी’ जैसे बहाने देकर मामलों को टाल देता है। कुशवाहा ने सवाल उठाया कि अगर चुने हुए प्रतिनिधियों के फैसलों को ही लागू नहीं किया जाएगा, तो फिर पंचायत चुनावों का क्या मतलब रह जाता है।
पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि मौजूदा सिस्टम में उप विकास आयुक्त (डीडीसी) के हाथ में बहुत ज्यादा ताकत केंद्रित हो गई है। फंड का नियंत्रण, योजनाओं की मंजूरी और फैसलों को रोकने का अधिकार एक अधिकारी के पास होने से जनप्रतिनिधियों की भूमिका लगभग खत्म-सी हो गई है, जिससे लोकतंत्र की जड़ें हिल रही हैं।
प्रदर्शन में शामिल जिला परिषद सदस्य पूजा देवी, बेबी देवी, सुनैना देवी, गायत्री देवी, धर्मेंद्र कुमार ठाकुर, मनोज कुशवाहा, विजेंद्र पाल, अशोक यादव, दीपक यादव, नीरज यादव, विश्वा यादव समेत सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि नौकरशाही की उदासीनता और अफसरशाही के रवैये के चलते बक्सर जिला परिषद की करीब 80 करोड़ रुपये की राशि खर्च नहीं हो पाई है।
धरने के दौरान वक्ताओं ने अस्पतालों की खस्ता हालत, शिक्षा क्षेत्र में गिरावट, जलभराव की समस्या, सिंचाई की कमी, कल्याणकारी योजनाओं में गड़बड़ी, आवास-पेंशन और राशन वितरण की अनियमितताओं जैसे अनेक मुद्दों को उठाया। साथ ही कृषि आपदा से जूझ रहे किसानों को मुआवजा न मिलने पर भी गहरी नाराजगी जताई गई।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन तमाम मुद्दों को सदन में बार-बार उठाया गया, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इन्हीं शिकायतों के खिलाफ जिला परिषद सदस्यों ने यह अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है, जो उनकी मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा।


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