जनमित्र: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ में लगी सामाजिक कार्यकर्ताओं की होर्डिंग को हटाने का निर्देश दिया. राजधानी लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र में मुख्य चौराहे और विधानसभा भवन के सामने चौराहों पर आंदोलनकारियों के पोस्टर लगाए गए है जिसमें मानवाधिकार वकील मोहम्मद शोएब, कार्यकर्ता और पूर्व आईपीएस अधिकारी एस आर दारापुरी, व सामाजिक कार्यकर्ता सदफ जाफ़र, आदि के चित्र भी एक बैनर में लगाए गए है.

इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए, उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने एक विशेष अदालत आयोजित कर तत्काल होर्डिंग हटाने का फैसला किया. चीफ जस्टिस गोविंद माथुर एवं जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने पोस्टरों को बेहद अन्यायपूर्ण करार दिया कोर्ट के मुताबिक आज तीन बजे तक होर्डिंग हटवाकर इसकी जानकारी को कोर्ट को देनी है. हाईकोर्ट के अधिवक्ता रमेश कुमार के मुताबिक कोर्ट ने लखनऊ के डीएम और डिवीजनल पुलिस कमिश्नर से पूछा कि कानून के किस प्रावधान के तहत लखनऊ की सड़कों पर इस तरह के पोस्टर लगाए गए हैं. हाईकोर्ट का मानना है कि किसी सार्वजनिक स्थान पर संबंधित व्यक्ति की अनुमति के बिना उसका फोटो या पोस्टर लगाना गलत है। यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है.




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