द जनमित्र | शशि
### : बक्सर के अस्थायी रूप से बंद, 300 मजदूरों की छंटनी
केंद्र सरकार की नई इथेनॉल नीति के कारण बिहार के बक्सर जिले के नावानगर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित भारत प्लस एथनॉल प्राइवेट लिमिटेड का प्लांट बंद हो गया है। कंपनी के सीएमडी अजय कुमार सिंह ने मंगलवार सुबह घोषणा की कि इथेनॉल आवंटन में भारी कटौती के चलते प्लांट को डेढ़ महीने के लिए बंद किया जा रहा है। इस फैसले से करीब 300 मजदूरों को घर भेज दिया गया है, जिससे उनके सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

कंपनी का दावा है कि उसकी स्थापित क्षमता 36,500 किलोलीटर सालाना है, लेकिन 2025-26 के लिए जारी टेंडर में उसे मात्र 16,299 किलोलीटर का ही ऑर्डर मिला। सीएमडी अजय कुमार सिंह ने कहा, “नई नीति के तहत हमें प्राथमिकता सूची में तीसरे स्थान पर रखा गया है, जबकि हमारा प्लांट ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) के साथ 10 साल के लॉन्ग टर्म ऑफटेक एग्रीमेंट पर आधारित है। यह समझौते की भावना के खिलाफ है।” उन्होंने आगे बताया कि पहले से आशंका जताई गई थी कि 365 दिनों में से करीब 202 दिन प्लांट बंद रह सकता है, जो अब हकीकत बन गई है।
नई नीति में कोऑपरेटिव शुगर मिल्स को पहली प्राथमिकता दी गई है, साथ ही शर्त जोड़ी गई कि 40 प्रतिशत उत्पादन एफसीआई चावल से होना चाहिए। कंपनी का कहना है कि यह शर्त पहले के समझौतों में शामिल नहीं थी, जिससे डेडीकेटेड इथेनॉल प्लांट्स (डीईपी) को नुकसान पहुंचा है।
इस बंदी का समय ऐसा है जब बिहार सरकार बक्सर जिले को औद्योगिक हब बनाने की बड़ी योजनाएं चला रही है। नावानगर में 109 करोड़ रुपये की लागत से 125 एकड़ पर इकोनॉमिक जोन विकसित करने का काम चल रहा है। पेप्सीको जैसे बड़े ब्रांड यहां निवेश कर रहे हैं। हालांकि, नीतिगत अस्थिरता से निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है।
कंपनी ने इस फैसले के खिलाफ उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा है, जिसकी प्रति प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, पेट्रोलियम मंत्री और बिहार सरकार को भी भेजी गई है। कंपनी ने 2025-26 के लिए कम से कम 33,000 किलोलीटर आवंटन की मांग की है, ताकि प्लांट सुचारू रूप से चल सके और रोजगार बना रहे।
कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नावानगर दौरे के दौरान सीएमडी अजय कुमार सिंह ने यह समस्या उनके सामने रखी थी। कंपनी का कहना है कि बिहार सरकार इस मुद्दे पर केंद्र से लगातार संपर्क में है और स्थायी समाधान के प्रयास कर रही है।
इधर, बक्सर में इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हैं। वरिष्ठ पत्रकार कंचन किशोर का कहना है कि बिहार में इथेनॉल प्लांट को औद्योगिक विकास का मॉडल बताया गया था, लेकिन नीतिगत बदलावों का खामियाजा अब उद्योग और मजदूर दोनों भुगत रहे हैं। यदि जल्द हल नहीं निकला तो शाहाबाद क्षेत्र के उद्योग जगत को बड़ा झटका लगेगा। नए साल से ठीक पहले 300 मजदूरों की छंटनी सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच गहरे फर्क को रेखांकित करती है।
यह मामला केंद्र की 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य (2025 तक) से जुड़ा है, जहां कोऑपरेटिव मिल्स को प्राथमिकता देकर ग्रेन-बेस्ड और डेडीकेटेड प्लांट्स प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नीतिगत स्थिरता न हो तो निवेश और रोजगार दोनों पर असर पड़ेगा।


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