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बक्सर पहुंचे बिहार राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष

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द जनमित्र | शशि

बिहार राज्य अनुसूचित जनजाति (एसटी) आयोग के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार गढ़वाल सोमवार को बक्सर पहुंचे। यहां उन्होंने ऐतिहासिक स्थलों का निरीक्षण किया और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ अनुसूचित जनजाति से संबंधित लंबित मामलों की गहन समीक्षा की। बक्सर पहुंचते ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया।

अध्यक्ष गढ़वाल ने सबसे पहले चौसा स्थित ऐतिहासिक शेरशाह सूरी-हुमायूं युद्धस्थल का दौरा किया। इस दौरान आयोग के सदस्य राजू खरवार भी उनके साथ मौजूद रहे। चौसा में उन्होंने पारंपरिक लिट्टी-चोखा के मैत्री भोज में शिरकत की और स्थानीय लोगों से सीधा संवाद स्थापित कर क्षेत्र की समस्याओं तथा संभावनाओं को समझा। गढ़वाल ने कहा कि आयोग का मुख्य लक्ष्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और अधिकार पहुंचाना है।

मीडिया से बातचीत में शैलेंद्र गढ़वाल ने बक्सर को ‘वीरों की भूमि’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यहां कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं, जिन्हें संरक्षित और विकसित करने की जरूरत है। विशेष रूप से १५३९ में शेरशाह सूरी और मुगल शासक हुमायूं के बीच हुए चौसा युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह स्थल कर्मनाशा और गंगा नदी के संगम पर स्थित है, जो बक्सर जिला मुख्यालय से करीब ११ किलोमीटर पश्चिम में है। गढ़वाल ने सुझाव दिया कि यदि इस स्थल को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाए तो पर्यटकों की आमद बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

आयोग के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल कार्यालयों में बैठकर काम करना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना है। उन्होंने बताया कि बक्सर जिले में अनुसूचित जनजाति से जुड़े कई मामले लंबे समय से लंबित हैं। आयोग ने पिछले सात महीनों में पत्र भेजे और ११ महीनों तक रिमाइंडर दिए, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। इसी वजह से वे स्वयं बक्सर आए हैं ताकि अधिकारियों के साथ बैठक कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

इस वर्ष २ जून को पदभार ग्रहण करने के बारे में पूछे गए सवाल पर गढ़वाल ने कहा कि चुनाव के कारण कुछ समय कार्य प्रभावित रहा, लेकिन अब चुनाव संपन्न होने के बाद वे लगातार बिहार के आदिवासी क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि कई आदिवासी लोगों को अपने अधिकारों और आयोग की भूमिका की पूरी जानकारी नहीं है। आयोग का प्रयास है कि लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनी जाएं और उन्हें अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाए।

उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर मामलों को दबाने या मनमाने तरीके से चलाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समस्याएं सामने आएंगी तो उन्हें लिखित रूप में दर्ज कर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

आयोग के इस दौरे से बक्सर जिले में अनुसूचित जनजाति समुदाय को उम्मीद जगी है कि उनके लंबित मामले जल्द निपटेंगे और क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों को नई पहचान मिलेगी।

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