द जनमित्र डेस्क
जिला मुख्यालय में बन रहे नए अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय भवन की निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे हैं। सदर एसडीएम ने स्वयं निर्माण स्थल का निरीक्षण किया, जहां कई अनियमितताएं सामने आईं। इन खामियों पर एसडीएम ने तीखी नाराजगी जताई और विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।

निरीक्षण के दौरान एसडीएम को पता चला कि निर्माण स्थल पर प्राक्कलन राशि, कार्य योजना और निर्माण अवधि से जुड़ा कोई सूचना बोर्ड नहीं लगा है। साथ ही, गुणवत्ता नियंत्रण के लिए जिम्मेदार कोई कर्मचारी भी मौके पर मौजूद नहीं था। सरकारी निर्माण नियमों के अनुसार, ऐसी परियोजनाओं में सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य है, ताकि जनता को परियोजना की पूरी जानकारी उपलब्ध हो सके।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम ने भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता को तत्काल विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। बताया जाता है कि यह नया तीन मंजिला भवन उस जगह पर बनाया जा रहा है, जहां पहले एसपी (एसडीपीओ) कार्यालय चलता था। पुराने भवन को ध्वस्त करने के बाद लगभग आठ फीट गहरी खुदाई कर पिछले कई महीनों से निर्माण कार्य चल रहा है।
एक ही परिसर में एसडीएम और एसडीपीओ कार्यालय की सुविधा
यह भवन जिला प्रशासन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है। पूरा होने पर इसमें एसडीएम और एसडीपीओ दोनों के कार्यालय एक ही परिसर में संचालित होंगे। इससे विधि-व्यवस्था संबंधी मामलों में बेहतर समन्वय होगा और आम जनता को भी एक छत के नीचे दोनों अधिकारियों से मिलने की सुविधा मिलेगी। वर्तमान में दोनों कार्यालय अलग-अलग जगहों पर हैं, जिससे समन्वय में दिक्कतें आ रही हैं। नए भवन से दूर-दराज से आने वाले लोगों को राहत मिलेगी और स्थान की कमी से जूझ रहे कर्मचारियों को भी बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया था। अनुमानित लागत लगभग आठ करोड़ रुपये है।
अभियंता ने गुणवत्ता की कमी से किया इनकार
इस संबंध में भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता रूपेश कुमार ने कहा कि निर्माण में गुणवत्ता की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि वे खुद कई बार स्थल का निरीक्षण कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि कार्य योजना का बोर्ड अभी नहीं लगा है, जिसे शीघ्र लगवा दिया जाएगा।

Comment here