ग्राउंड रिपोर्ट

उचित मुआवजे के लिए किसानों ने उठाई आवाज, सड़क निर्माण ठप किया

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द जनमित्र डेस्क

बिहार के बक्सर जिले के चौसा प्रखंड में राष्ट्रीय राजमार्ग-319A (NH-319A) के निर्माण कार्य को स्थानीय किसानों ने रोक दिया है। किसानों का आरोप है कि उनकी जमीन का उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा, जिसके चलते उन्होंने जेसीबी मशीनों को खेतों के पास पहुंचने से रोक दिया। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक पूरा मुआवजा नहीं मिलता, तब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा।

निर्माण कार्य रोके जाने की खबर मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। दंगा नियंत्रण पुलिस वज्र वाहन के साथ मौके पर पहुंची, जिससे कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति पैदा हो गई। बाद में बक्सर के अपर भू-अर्जन पदाधिकारी कौसर इमाम ने किसानों से वार्ता कर माहौल शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि प्रशासन का इरादा किसानों और अधिकारियों के बीच सामंजस्य से ही काम आगे बढ़ाने का है। हालांकि, किसान जेसीबी मशीनों को हटाने की मांग पर अड़े रहे, जिससे उस दिन काम शुरू नहीं हो सका।

मुआवजा नीति पर किसानों का आक्रोश
मौके पर मौजूद किसान हीरामणि राय ने सरकार और प्रशासन की मुआवजा नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज भी किसानों को 2013 के मार्केट वैल्यू रेट (एमवीआर) के आधार पर मुआवजा दिया जा रहा है, जो बेहद अन्यायपूर्ण है। “पिछले 13 सालों में मंत्री, विधायक, अधिकारी और कर्मचारियों के वेतन-भत्तों में कई गुना बढ़ोतरी हुई, लेकिन किसानों के लिए पुरानी दरें ही लागू की जा रही हैं।”

राय ने आगे आरोप लगाया कि उनकी जमीन न्यायपुर क्षेत्र में आती है, जो नगर पालिका के दायरे में है, फिर भी बिना सही वर्गीकरण के मुआवजा तय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन पुलिस बल के दम पर जबरन जमीन पर काम कराना चाहता है, जिसे किसान बर्दाश्त नहीं करेंगे।

किसान नेताओं का समर्थन, आंदोलन की चेतावनी
इस दौरान थर्मल पावर प्रभावित किसान खेतिहर मजदूर मोर्चा के अध्यक्ष सहित अन्य किसान नेता मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से किसानों की मांगों पर सख्ती से बात की। नेताओं ने कहा कि NH-319A निर्माण के लिए किसानों पर दबाव डालकर जबरन काम कराने की कोशिश की गई, लेकिन किसानों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया।

उन्होंने मुख्य मांग रखी कि पहले किसानों के खाते में पूरा मुआवजा जमा हो, फिर विश्वास में लेकर काम शुरू किया जाए। चेतावनी दी गई कि अगर किसानों को बहलाने-फुसलाने या गुमराह करने की कोशिश हुई तो चौसा के किसान चुप नहीं बैठेंगे।

किसान नेता ने याद दिलाया कि चौसा के किसान 17 अक्टूबर 2022 से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस दौरान सैकड़ों किसानों पर मुकदमे दर्ज हुए, कई जेल गए और कुछ को गंभीर चोटें भी आईं, लेकिन किसान पीछे नहीं हटे। उन्होंने घोषणा की कि किसान प्रतिनिधिमंडल सोमवार को बक्सर जिलाधिकारी से मिलेगा और मुआवजे की दर व प्रक्रिया पर स्पष्ट जवाब मांगेगा।

किसानों की प्रमुख मांग है कि कमिश्नर स्तर पर कैंप लगाकर जमीन का सही वर्गीकरण किया जाए और समस्याओं का समाधान हो। अपर भू-अर्जन पदाधिकारी कौसर इमाम ने मीडिया से कहा कि वे वीडियो बाइट देने के लिए अधिकृत नहीं हैं, लेकिन प्रशासन किसानों के सहयोग से ही काम कराना चाहता है। किसानों ने डीएम से मिलने के लिए समय मांगा है।

फिलहाल चौसा में NH-319A का निर्माण कार्य किसानों के विरोध से ठप पड़ा है। आज काम नहीं हो सका, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि बातचीत के बाद आगे कार्रवाई होगी। सबकी नजरें अब जिलाधिकारी के साथ होने वाली बैठक पर टिकी हैं।

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