द जनमित्र डेस्क
बिहार के डुमरांव नगर परिषद में भ्रष्टाचार के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। सड़क निर्माण के बाद अब हाईमास्ट लाइटिंग व्यवस्था में करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप लग रहे हैं। शहरवासियों में इसको लेकर व्यापक चर्चा है कि हाईमास्ट लाइट लगाने के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं।

सूत्रों के अनुसार, पूर्व कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार के कार्यकाल में शहर में 150 हाईमास्ट लाइट लगाने के लिए टेंडर जारी किया गया था। आरोप है कि यह टेंडर एक करीबी एजेंसी को दिया गया। नगर परिषद के एक कर्मचारी ने दावा किया है कि एजेंसी ने 150 की जगह केवल 95 हाईमास्ट लाइट ही लगाईं, लेकिन भुगतान पूरे 150 लाइटों का कर दिया गया। एक हाईमास्ट लाइट की लागत करीब 12 लाख रुपये दिखाई गई, जिससे कुल राशि लगभग 18 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
लाइटों की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। नगर परिषद के बिजली मिस्त्री सिमरन ने वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी को सौंपे लिखित प्रतिवेदन में घटिया सामग्री के उपयोग का जिक्र किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई जगहों पर टाइमर, कनेक्टर और लाइट स्टैंड तक नहीं लगाए गए, जिससे रखरखाव में भारी समस्या हो रही है। कहीं लाइटें रात में नहीं जल रही हैं तो कहीं दिन में बुझ नहीं रही हैं।
स्थिति यह है कि कुछ महीने पहले लगाई गईं इन हाईमास्ट लाइटों में से 50 प्रतिशत से अधिक अब खराब हो चुकी हैं। थाना गेट, खिरौली मोड़, डूमरेजनी मंदिर, गौशाला रोड सहित कई प्रमुख चौक-चौराहे अंधेरे में डूबे हुए हैं। स्थानीय निवासी मोहन जी गुप्ता ने कहा, “घटिया लाइटों से आम नागरिकों को भारी परेशानी हो रही है और अपराध बढ़ने का खतरा भी बढ़ गया है।”
राजद नगर अध्यक्ष मुन्ना खान ने आरोप लगाया कि हाईमास्ट लाइट नगर परिषद के लिए कमाई का जरिया बन गई है। उन्होंने कहा कि पूर्व ऑडिट में भी लाइटिंग कार्यों में अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं और कई महत्वपूर्ण फाइलें गायब हो गई हैं।
मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान के रामबहादुर सिंह ने मांग की है कि नगर परिषद सभी हाईमास्ट लाइटों की सूची, उनके स्थान और लागत के साथ सार्वजनिक करे। उनका कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच हुई तो बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा होगा।
इसी क्रम में श्यामजी गुप्ता, राजीव रंजन सिंह, मनोज सिंह, मोहनजी गुप्ता सहित कई स्थानीय लोगों ने हाईमास्ट लाइट मामले की तत्काल उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
नगर परिषद प्रशासन की ओर से इस मामले पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। शहरवासी जांच की मांग को लेकर आशान्वित हैं कि सच जल्द सामने आएगा।


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