द जनमित्र | शशि
बक्सर में राजनीतिक तापमान चढ़ता जा रहा है! शुक्रवार को भाकपा (माले) के कार्यकर्ताओं ने एसडीएम अविनाश कुमार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अंबेडकर चौक से ज्योति चौक तक की रैली में नारे गूंजे, और मांग की गई कि एसडीएम को तुरंत बर्खास्त किया जाए। पूरा मामला एक युवक राम कुमार राम की गिरफ्तारी से जुड़ा है, जिसे धारा 107 के तहत जेल भेज दिया गया। लेकिन कानून के पंडितों का कहना है कि इस धारा में तो जेल भेजने का कोई प्रावधान ही नहीं है – बस पर्सनल बॉन्ड पर छोड़ना चाहिए। तो फिर ये क्या माजरा है?

माले के नेताओं ने कहा कि एसडीएम खुद को कानून से ऊपर समझते हैं और मनमाने फरमान जारी करते हैं। राम कुमार को इसी तरह की मनमानी का शिकार बनाया गया। सामान्य नियमों के मुताबिक, आरोपी को बॉन्ड भरवाकर घर भेज दिया जाता है, लेकिन यहां तो सीधे सलाखों के पीछे!
वकीलों और एसडीएम के बीच ‘कोर्ट वॉर’
ये आग एक दिन पहले ही भड़की थी, जब वकीलों और एसडीएम कोर्ट में तीखी झड़प हो गई। वकीलों ने एसडीएम पर मनमानी और बदसलूकी के आरोप लगाए। अब वो झड़प सड़कों पर गूंज रही है, और लगता है कि ये सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
थाना प्रभारी भी निशाने पर
माले वाले सिकरौल थाना प्रभारी विजय बहादुर सिंह को भी नहीं बख्श रहे। उनका दावा है कि पूरा खेल थाना प्रभारी के रिश्तेदारों के दबाव में खेला गया। राम कुमार को चौकीदार के जरिए थाने बुलाया गया, ये कहकर कि थानाध्यक्ष ने उसकी बेटी को गाली दी है और FIR दर्ज करनी है। लेकिन थाने पहुंचते ही 14 सितंबर को उसे सीधे एसडीएम के पास धकेल दिया गया। वहां देर तक बैठाकर आखिरकार जेल की राह दिखा दी गई।
‘सांठगांठ’ का बड़ा आरोप
प्रदर्शनकारियों का सीधा इल्जाम है कि एसडीएम, थाना प्रभारी और विजय बहादुर सिंह के बीच गहरी मिलीभगत है। इसी ‘टीम वर्क’ की वजह से एक निर्दोष युवक को जेल की हवा खानी पड़ रही है।
माले की अल्टीमेटम: जमानत दो, एसडीएम हटाओ
भाकपा (माले) ने साफ-साफ दो मांगें रखी हैं: पहली, राम कुमार राम को फौरन जमानत मिले। दूसरी, इस ‘तानाशाह’ एसडीएम अविनाश कुमार को पद से हटाया जाए। चेतावनी भी दी गई कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज रफ्तार दी जाएगी।

Comment here