बिहार की बिगड़ती विधि व्यवस्था पर बीजेपी उठा रही है सवाल तो कांग्रेस विधायक ने कहा चार महीने पहले क्या उनकी सरकार नही थी तो नही हो रहा था हत्या और बलात्कार.
द जनमित्र | डेस्क
बक्सर : बिहार की राजधानी पटना से लेकर अन्य जिले में बढ़ी आपराधिक घटनाओं को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता वर्तमान महागठबंधन की सरकार पर लगातार हमलावर है. बीजेपी के कई नेता बढ़े आपराधिक घटनाओं की तुलना 1990 से करते हुए इसे जंगल राज पार्ट टू की संज्ञा दे रहे है. वही महागठबन्धन के नेताओं ने भी अब बीजेपी पर चौतरफा जुबानी हमला करना शुरू कर दिया है.

कांग्रेस ने बीजेपी से पूछा सवाल आपके राज में कब था मंगल राज
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा विधि व्यवस्था पर उठाये जा रहे सवाल के बाद सदर कांग्रेस विधायक संजय तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर पलटवार करते हुए कहा कि चार महीने पहले आप ही की सरकार थी. क्या आपके सरकार में रेप, गैंगरेप, हत्या, डकैती, चोरी, बैंक रोबरी की घटनाए नहीं होती थी?
महागठबन्धन के बढ़ते आकार को देख बीजेपी नेताओं ने खो दिया है मानसिक संतुलन
वहीं उन्होंने कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी के नेता लगातार बयान दे रहे हैं कि बिहार बारूद के ढे़र पर बैठा हुआ है, और बिहार में जंगलराज पार्ट 2 का दौर जारी है लेकिन बीजेपी के नेता यह बताएं कि बिगड़ती विधि व्यवस्था का सूत्रधार कौन है? सासाराम, और बिहारशरीफ में दंगा किसने कराया? आज जो बिहार की हालात है उसका जिम्मेवार भारतीय जनता पार्टी के नेता ही हैं जो कही दंगा भड़काते हैं तो कहीं मंदिर, मस्जिद और हिंदू, मुसलमान के नाम पर लोगों को आपस में लड़वाते हैं. महागठबंधन के बढ़ते हुए आकार को देखकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है. यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं. लेकिन ये बयान बहादुर नेता कितना भी बयान देते रहे इस बार दिल्ली की कुर्सी से इनकी विदाई तय है और इनका कोई भी पैतरा इस बार काम नहीं आएगा.

गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटे सभी राजनीतिक पार्टी के नेता एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हुए हैं. 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में मिली बड़ी सफलता के बाद जहां भारतीय जनता पार्टी के नेता 2024 की चुनाव जीतने के लिए चुनावी महाअभियान की शुरुआत कर दिए हैं. वही महागठबंधन के नेता अगले महीने राजधानी पटना में बैठक कर नए चुनावी रणनीति को तैयार करेंगे. देखने वाली बात यह होगी कि 2024 के लोकसभा चुनाव का सेहरा किसके सर सजता है.



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