जनमित्र/बक्सरः भारत की जनवादी नौजवान सभा डीवाईएफआई एवं भारत का छात्र फेडरेशन (एसएफआई), एआईएसएफ तथा कई सामाजिक एवं बुद्धिजीवी संगठनों के वरिष्ठ समाजसेवियों ने भूख से यात्रा के दौरान रास्ते में दिवंगत सभी मजदूरों को शहीद बताया एवं सभी संगठनों के संयुक्त तत्वधान में कोरोना काल में देश में बड़े स्तर पर मजदूरों का एक राज्य से अपने घर की तरफ पलायन के दौरान असुविधाओं के कारण हजारों किलोमीटर की यात्राएं पैदल करनी पड़ी. जिसमें दर्जनों मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी जो देश पर एक बहुत बड़ा जख्म है. जो सवाल पूछता है कि क्या इतने समृद्ध भारत की यही दुर्दशा होनी चाहिए कि हम अपने देशवासियों को बचा भी ना पाए. उनके लिए सुविधा उपलब्ध न करा पाए. कांग्रेस नेता डॉक्टर सत्येंद्र ओझा ने

कहा की ट्रैक एवं सड़क पर हुए हादसे में मारे गए लोगों की जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए. भारत की जनवादी नौजवान सभा के जिला अध्यक्ष राजेश कुमार शर्मा ने प्रेस बयान जारी कर सरकार एवं प्रतिनिधियों से अपील की कि किसान एवं मजदूर निर्माणकर्ता एवं अन्नदाता हैं. जिस प्रकार सैनिक सीमा पर सुरक्षा करते हैं ठीक उसी प्रकार किसान एवं मजदूर हमारी भूख मिटाते हैं एवं हमारी जरूरत की सुविधाओं युक्त वस्तुओं से हमें लाभान्वित करते हैं तो इनकी सुविधाओं को दरकिनार कर हम कैसे अपनी नैतिकता खो सकते हैं सरकार को इन मृतक मजदूरों के परिजनों को आर्थिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए सभी दिवंगत मजदूरों को शहीद का दर्जा देना चाहिए तथा इनके परिवारों को संरक्षण प्रदान करना चाहिए. सभी संगठन 2 मिनट का मौन रखकर शहीद मजदूरों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की मौके पर दर्जनों साथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की जिसमें एसएफआई के जिला अध्यक्ष दीपेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष प्रतीक आनंद, रितेश कुमार, संतोष कुमार शर्मा सीपीआईएम के नेता धीरेंद्र कुमार चौधरी सीपीआई के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद वरीय अधिवक्ता कामरेड तेज नारायण सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार कुमार नयन, विष्णु कुमार शिक्षक राजकुमार वर्मा, मजदूर नेता शिव प्रकाश यादव सहित सैकड़ों लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.

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