द जनमित्र डेस्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर बिहार में चलाए जा रहे ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम पर कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ निशाना साध लिया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने आरोप लगाया है कि इस आयोजन के लिए सरकारी मशीनरी और कर्मचारियों का खुला इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि बाढ़ जैसी आपदा के बीच सरकारी संसाधनों को इस तरह के कार्यक्रमों में लगाने का क्या औचित्य है।

सूत्रों के मुताबिक 17 सितंबर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत हो रही है। इसके अंतर्गत बक्सर समेत राज्य के कई जिलों में ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कटिहार सहित विभिन्न जगहों पर स्कूलों, प्रखंड कार्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों में दीप जलाने की तैयारियां चल रही हैं।
डॉ. वर्धन ने कहा कि 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का दिन भी है। इसके बावजूद सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों को शाम के वक्त कार्यक्रम में शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। कांग्रेस ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोग अभी भी परेशान हैं। ऐसे में प्रशासन का ध्यान राहत-बचाव कार्यों और आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान पर होना चाहिए, न कि इस तरह के आयोजनों पर।
कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि प्रखंड स्तर पर कर्मचारियों को मौखिक रूप से बड़ी संख्या में लोगों के वीडियो बनाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इन वीडियो में 2014 के बाद केंद्र की योजनाओं और उनसे मिले लाभों का जिक्र करने को कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के जरिए केंद्र की योजनाओं का प्रचार कार्यक्रम को राजनीतिक रंग देने वाला है।
डॉ. वर्धन ने महिला कर्मचारियों और शिक्षकों की सुरक्षित घर वापसी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पूछा कि विश्वकर्मा पूजा के दिन शाम तक कार्यक्रम चलने के बाद खासकर महिला कर्मियों के घर पहुंचने के इंतजाम क्या किए गए हैं। कांग्रेस ने राज्य सरकार से सरकारी संसाधनों और कर्मचारियों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही शिक्षा विभाग से संबंधित निर्देश वापस लेने की मांग की गई है। डॉ. वर्धन का कहना है कि सरकारी संस्थानों का इस्तेमाल किसी एक व्यक्ति के जन्मदिन मनाने के लिए नहीं होना चाहिए।

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