द जनमित्र डेस्क
बक्सर जिले के चौसा नगर पंचायत में स्थानीय प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। यहां बोर्ड और सशक्त स्थायी समिति की बैठकें समयानुसार न बुलाए जाने का गंभीर मामला अब सीधे राज्य निर्वाचन आयोग की चौखट तक पहुंच गया है। पार्षदों के एक बड़े समूह द्वारा की गई शिकायत के बाद आयोग ने बक्सर के जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी को त्वरित जांच कर यथोचित कदम उठाने का सख्त निर्देश जारी किया है।

मिली जानकारी के अनुसार, वार्ड संख्या 04 के पार्षद दिनेश कुमार समेत कुल दस पार्षदों ने आयोग के समक्ष एक लिखित परिवाद दाखिल किया था। इस शिकायत में मुख्य रूप से यह रेखांकित किया गया कि नगर पंचायत प्रबंधन द्वारा नियमों को ताक पर रखकर बोर्ड और स्थायी समिति की बैठकों का नियमित संचालन नहीं किया जा रहा है। पार्षदों का तर्क है कि इस तरह की प्रशासनिक सुस्ती और बैठकों के अभाव से क्षेत्र के विकास कार्य पूरी तरह बाधित हो रहे हैं और जरूरी जनहित के मुद्दों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा पा रहा है, जिससे जनप्रतिनिधियों में आक्रोश व्याप्त है।
शिकायत को संज्ञान में लेते हुए राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार ने बीते 30 जुलाई को एक आधिकारिक पत्र जारी किया। इस पत्र के माध्यम से बक्सर डीएम को निर्देशित किया गया है कि वे परिवाद में उठाए गए तमाम बिंदुओं की बारीकी से जांच करें तथा नियमानुसार विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करें। इसके साथ ही पूरी रिपोर्ट से आयोग को अविलंब अवगत कराने को भी कहा गया है।
प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई की गूंज के बीच पत्र की प्रतियां एहतियात के तौर पर शिकायतकर्ता पार्षद दिनेश कुमार के अलावा राज्य निर्वाचन आयोग के समाधान पोर्टल, लोक शिकायत निवारण कोषांग, पटना प्रमंडल के आयुक्त तथा नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को सूचनार्थ एवं अग्रतर कार्रवाई के लिए भेज दी गई हैं।
स्थानीय जानकारों का मानना है कि बैठकों के इस अनियंत्रित स्थिति की वजह से से चौसा नगर पंचायत के वार्डों में होने वाले विकास कार्यों और जनता से जुड़े जरूरी प्रस्तावों पर ग्रहण लग सकता है। बहरहाल, निर्वाचन आयोग के इस कड़े रुख के बाद अब जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर पूरे इलाके की निगाहें टिक गई हैं।

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