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करोड़ों के परमाणु बिजली परियोजना पर सांसद ने उठाए सवाल

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द जनमित्र डेस्क

बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार सरकार द्वारा उद्योग क्षेत्र में किए गए एक बड़े निवेश समझौते को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने हैदराबाद स्थित ग्लोबल रिन्यूएबल एडवांस क्लीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुए करीब 22,500 करोड़ रुपये के परमाणु बिजलीघर निर्माण संबंधी समझौते पर कंपनी की योग्यता और पूर्व अनुभव को लेकर चिंता जताई है।

सांसद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए यह मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि राज्य में निवेश आकर्षित करने के मकसद से बिहार सरकार ने कई कंपनियों से समझौते किए हैं, जिनमें परमाणु ऊर्जा संयंत्र संबंधी समझौता सबसे बड़ा है। कंपनी का नाम सामने आने के बाद उन्होंने इसकी पृष्ठभूमि की जांच की।

उनके अनुसार यह कंपनी 25 फरवरी 2026 को अस्तित्व में आई है। सांसद का दावा है कि इसके पास न तो परमाणु बिजलीघर चलाने का कोई अनुभव है और न ही किसी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट को संभालने का। कंपनी की अधिकृत पूंजी महज 10 लाख रुपये बताई गई है। उन्होंने सवाल किया कि कुछ महीने पहले बनी और इतनी मामूली पूंजी वाली कंपनी बिहार में इतने बड़े पैमाने के निवेश का वादा कैसे कर रही है।

सुधाकर सिंह ने उम्मीद जताई कि उद्योग विभाग ने कंपनी की आर्थिक क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता और पिछले अनुभव की पूरी तरह जांच की होगी। उन्होंने पूछा कि इतनी संवेदनशील परियोजना के लिए ऐसी नई कंपनी के साथ समझौता कितना उचित है।

परमाणु बिजलीघर की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। चेरनोबिल और फुकुशिमा जैसी दुर्घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं में सुरक्षा व्यवस्था और आपात स्थिति से निपटने की तैयारी बेहद जरूरी होती है। देश में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में काम कर रही अनुभवी सरकारी और विदेशी कंपनियों के पास विशेषज्ञों की टीम, विकिरण निगरानी और आपात प्रतिक्रिया की व्यापक व्यवस्था होती है। नई कंपनी इन जिम्मेदारियों को कैसे संभालेगी, यह सवाल उनके मुताबिक महत्वपूर्ण है।

सांसद ने यह भी आशंका जताई कि कहीं यह समझौता किसी बड़ी कंपनी के लिए आगे प्रवेश का रास्ता तो नहीं बना रहा है। हालांकि बिहार सरकार या संबंधित कंपनी की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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