द जनमित्र डेस्क
बक्सर। मानसून के तेज होते रुख और गंगा नदी में जल स्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग ने अलर्ट मोड पर काम शुरू कर दिया है। बक्सर-कोईलवर गंगा तटबंध की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है।
अहिरौली से उमरपुर तथा नियाजीपुर से नैनीजोर तक करीब 20 किलोमीटर लंबे अति संवेदनशील खंडों में कटाव रोकने, दीवार मजबूत करने और जरूरी दुरुस्ती का काम तेज गति से जारी है। प्रशासन ने इन कमजोर हिस्सों को चिन्हित कर विशेष ध्यान दिया है।

तटबंध की सुरक्षा के लिए अब तक 25 हजार बालू भरे जियो बैग लगाए जा चुके हैं। इन बैगों का इस्तेमाल पानी के रिसाव और कटाव को तुरंत रोकने के लिए किया जा रहा है। अहिरौली, उमरपुर, नैनीजोर और केशोपुर समेत कई इलाकों में मिट्टी भराई, दीवारों को मजबूत बनाने और पुरानी क्षतियों की मरम्मत का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है।
जिलाधिकारी साहिला ने खुद मैदान में उतरकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पर्वतपुर डेरा, नैनीजोर, बिहार घाट पीपा पुल और ढाबी सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों का निरीक्षण किया। डीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ आने से पहले सभी कार्य पूरे कर लिए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि बाढ़ सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों के तहत जिला प्रशासन ने राहत सामग्री जुटाने, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमों की तैनाती का काम पूरा कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, 35 नाविकों के साथ अनुबंध हो चुका है, जिनमें से 18 नावों का पंजीकरण पूरा हो गया है। डीएम ने निर्देश दिया है कि बाढ़ से पहले सभी नावों का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए और पंचायत स्तर पर अनुश्रवण समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं।
बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, बक्सर-कोईलवर गंगा तटबंध जिले की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा दीवार है। अगर यह तटबंध किसी भी वजह से टूटा तो सिमरी, चक्की और ब्रह्मपुर प्रखंडों के दर्जनों गांव पानी में डूब सकते हैं। इससे लाखों की आबादी प्रभावित होगी, हजारों हेक्टेयर में खड़ी धान, मक्का और सब्जियों की फसलें तबाह हो जाएंगी। ग्रामीण सड़कें और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त होने के साथ ही जलजनित बीमारियों का खतरा भी大幅 बढ़ जाएगा।
इन्हीं संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पूरे तटबंध पर निगरानी बढ़ा दी है। संवेदनशील जगहों पर जियो बैग लगाए गए हैं और मानसून के दौरान 24 घंटे सतर्क नजर रखी जा रही है ताकि कोई भी आपात स्थिति तुरंत नियंत्रण में आ सके।

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