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दोहरे मामले में बक्सर डीटीओ जाँच के घेरे में, द जनमित्र ने चलाई थी खबर

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द जनमित्र डेस्क

बक्सर चेकपोस्ट से कोयला लदे ट्रक को घूस लेकर छोड़ने के मामले में वायरल हुए ऑडियो क्लिप का मामला जोर पकड़ता नजर आ रहा है। जिलाधिकारी ने इस वायरल क्लिप का स्वतः संज्ञान लेते हुए आरोपों की सच्चाई की जांच करने के लिए तीन सदस्यों की एक जांच दल का गठन किया है। गठित जांच दल के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे वायरल ऑडियो और वीडियो के हर पहलू की बारिकी से पड़ताल करें और अपनी संयुक्त जांच रिपोर्ट जल्द-से-जल्द जिलाधिकारी को पेश करें।

ज्ञात हो कि ‘द जनमित्र’ ने सबसे पहले इस खबर को चलाया था। जिसके बाद यह मामला आम लोगों से लेकर शासन-प्रशासन के बीच चर्चा का विषय बन गया।

क्या है पूरा मामला

13 मई की रात करीब तीन बजे परिवहन विभाग के सिपाही सूरज कुमार ने बिहार से उत्तर प्रदेश जा रहे कोयला भरे एक ट्रक को रोका। चेकपोस्ट पर तैनात होमगार्ड जवानों को इस वाहन की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया।

होमगार्ड जवान जितेंद्र तिवारी के अनुसार, उन्होंने ट्रक की चाबी और ड्राइवर का लाइसेंस रजिस्टर में दर्ज करने के लिए मांगा, लेकिन सिपाही ने उन्हें कुछ भी सौंपा नहीं। सुबह जब जवान ट्रक के पास पहुंचे तो वाहन वहां से गायब था। इसके बाद ट्रक नंबर के जरिए चालक से संपर्क किया गया।

चालक ने खुलासा किया कि 15 हजार रुपये देकर वाहन को रास्ता दिया गया। उसने बताया कि “जुगाड़ चाबी” लगाकर ट्रक निकाला गया ताकि भारी पेनल्टी न लगे।

मामला उलझा जब रिश्वतखोरी की शिकायत की जगह ड्यूटी पर मौजूद होमगार्ड जवानों पर ही आरोपों की बौछार शुरू हो गई। जितेंद्र तिवारी को डीटीओ कार्यालय से शो-कॉज नोटिस थमा दिया गया, जिसमें उन पर ही ट्रक छोड़ने का आरोप लगाया गया। जवान का कहना है कि उनकी भूमिका सिर्फ निगरानी तक सीमित थी।

जिलाधिकारी ने बक्सर प्रशासन की तरफ से यह साफ संदेश दे दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। जो भी इसमें दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध बेहद कठोर अनुशासनिक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

वही डीटीओ में शराब की बरामदगी का मामला अब तीखा राजनीतिक रूप ले चुका है। बक्सर सदर के पूर्व विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी ने इस घटना को बिहार की शराबबंदी नीति पर सीधा हमला बताते हुए जिला परिवहन पदाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

शुक्रवार को बक्सर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व विधायक मुन्ना तिवारी ने कहा कि बिना सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के परिवहन कार्यालय जैसे संवेदनशील स्थान पर शराब पहुंचना असंभव है। उन्होंने इस घटना को कानून प्रवर्तन की जिम्मेदारी वाले विभाग में गंभीर अनियमितता करार दिया।

पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की अपील की। उन्होंने 14 मई 2026 को हुई इस बरामदगी की घटना को मुख्यमंत्री के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ शराबबंदी अभियान का खुला उल्लंघन बताया। पूर्व विधायक ने मांग की कि परिवहन कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज को तुरंत जांच का हिस्सा बनाया जाए और जिस कमरे से शराब मिली है, उसे तत्काल सील कर दिया जाए ताकि सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है और एफआईआर की कॉपी मांगने पर भी टालमटोल का रवैया अपनाया जा रहा है।

पत्र में मुन्ना तिवारी ने लिखा कि कुछ लापरवाह अधिकारी सरकारी व्यवस्था को बदनाम करने में लगे हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री की निष्पक्ष और सख्त प्रशासनिक छवि का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में उनके हस्तक्षेप से ही व्यवस्था की गरिमा बनी रहेगी।

इस पत्र की प्रतिलिपि बिहार पुलिस महानिदेशक, मद्य निषेध विभाग के सचिव, पटना प्रमंडल के आईजी, शाहाबाद रेंज के डीआईजी, बक्सर के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई है।

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