द जनमित्र डेस्क
बक्सर जिले के मुफस्सिल थाना अंतर्गत एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है, जहां दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान एक तीन साल के बच्चे के साथ यौन हिंसा की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया गया। इस कुकृत्य में गांव के ही रहने वाले तीस वर्षीय सूरज चौबे को मुख्य आरोपी बनाया गया है, जिसे पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए धर दोचा है। घटना के बाद से स्थानीय इलाके में भारी रोष और दहशत का माहौल है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह वीभत्स घटना शनिवार की रात लगभग नौ बजे की है। पीड़ित बच्चा पंडाल के आसपास खेल रहा था, तभी आरोपी उसे अपनी चालाकी से फुसलाकर करीब सौ मीटर दूर स्थित एक धान के खेत में खींच ले गया। पंडाल में बज रहे लाउडस्पीकर और तेज डीजे के शोर के कारण मासूम की चीख-पुकार आसपास के लोगों तक नहीं पहुंच सकी। वारदात को अंजाम देने के बाद डरा-सहमा बच्चा रोते-बिलखते किसी तरह अपने घर पहुंचा और परिजनों को आपबीती सुनाई।
परिजनों के होश उड़ गए और उन्होंने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और प्रशासनिक अमला फौरन हरकत में आ गया। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, जिससे आरोपी सूरज चौबे की पहचान सुनिश्चित हुई। मुफस्सिल थानाध्यक्ष शंभू भगत ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है और पीड़ित मासूम को मेडिकल परीक्षण के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है। वहीं, बक्सर सदर डीएसपी गौरव पाण्डेय स्वयं इस संवेदनशील मामले की गहन छानबीन कर रहे हैं।
इस अमानवीय घटना ने समाज और अभिभावकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासी व प्रबुद्धजन डॉ एस एन सिंह का कहना है कि यह केवल एक परिवार का व्यक्तिगत आघात नहीं है, बल्कि यह हर उस माता-पिता के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो मेलों, शादी-ब्याह या पूजा पंडालों जैसे सार्वजनिक आयोजनों में बच्चों को यह मानकर बेफिक्र छोड़ देते हैं कि अपने ही लोग आसपास मौजूद हैं। उत्सव की चकाचौंध और भीड़भाड़ के बीच बच्चों पर से नजर हटना कितना खतरनाक साबित हो सकता है, इस घटना ने इसका खौफनाक उदाहरण पेश किया है।
विशेषज्ञों और पुलिस का मानना है कि ऐसे हालातों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक पल की भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि कोई अजनबी या परिचित भी अगर उन्हें अकेले में ले जाने की कोशिश करे, गलत नीयत से छुए या डराकर चुप रहने की धमकी दे, तो वे बिना डरे तुरंत किसी भरोसेमंद वयस्क को इसकी जानकारी दें। इसके साथ ही, बच्चों की बात को तवज्जो देते हुए उन्हें डांटने के बजाय उनकी बातों को गौर से सुनना अभिभावकों की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। महज तीन साल का मासूम अपनी रक्षा करने में असमर्थ होता है, ऐसे में उसकी हिफाजत की पूरी जिम्मेदारी बड़ों के कंधों पर है।

Comment here