द जनमित्र डेस्क
बिहार के बक्सर जिले के छोटे से कस्बे चौसा से निकलकर वैश्विक पटल पर अपनी छाप छोड़ने वाले मशहूर पहलवान अविनाश कुमार ने एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। आगामी जापान एशियन गेम्स के लिए उन्हें भारतीय रेसलिंग दल के सपोर्ट स्टाफ का अहम हिस्सा बनाया गया है। एक ग्रामीण अखाड़े से शुरू होकर एशियाई स्तर के खेल महाकुंभ तक का उनका यह सफर समूचे राज्य और कुश्ती बिरादरी के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण है।

मैट पर एक दमदार पहलवान के रूप में अपना लोहा मनवाने के बाद अब वे युवा प्रतिभाओं को निखारने का कार्य बखूबी कर रहे हैं। गौरतलब है कि साल 2016 की विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में उन्होंने भारतीय सेना की तरफ से शिरकत करते हुए दुनिया भर में सातवां मुकाम पाया था। इसके बाद 2019 में भी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगे का मान बढ़ाया। प्रतिस्पर्धी कुश्ती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने 2021 में सर्विसेज की टीम के साथ प्रशिक्षक की नई पारी शुरू की।
जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्पर्धा और साल 2023 के गोवा नेशनल गेम्स में उन्होंने बतौर कंडीशनिंग कोच अपनी शानदार सेवाएं दी थीं। वर्तमान समय में अविनाश पुणे स्थित भारतीय सेना के अति-महत्वाकांक्षी मिशन ओलंपिक कैंप में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों विंग्स के पहलवानों की शारीरिक दक्षता संवारने का जिम्मा भी उन्हीं के कंधों पर है। बीते दिनों हरियाणा के रोहतक में हुई अंडर-23 सीनियर और महिला राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी उन्हें बिहार दल के प्रशिक्षक का दायित्व सौंपा गया था।
अविनाश के इस नए अंतरराष्ट्रीय असाइनमेंट से क्षेत्रीय खेल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह है। इस शानदार उपलब्धि पर रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के वर्तमान अध्यक्ष संजय सिंह, पूर्व मुखिया बृजभूषण शरण सिंह, बिहार कुश्ती संघ के अध्यक्ष विशाल सिंह व सचिव विनय कुमार तथा बक्सर इकाई के अध्यक्ष अशोक सिंह एवं सचिव विकास राज ने उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
कुश्ती प्रशासकों का मानना है कि अविनाश की यह कामयाबी सुदूर इलाकों के उन तमाम उदीयमान खिलाड़ियों के लिए एक सशक्त मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर अभ्यास और अदम्य इच्छाशक्ति के दम पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर छा जाने का सपना देखते हैं।

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