मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
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खेत हो या सड़क, हर जगह आफत बन रहे जानवरों का झुंड

द जनमित्र डेस्क

इलाके के किसान इन दिनों वन्य जीवों के बढ़ते दबाव से जूझ रहे हैं। घोड़परास और हिरणों के बड़े झुंड खेतों में घुसकर धान व सब्जियों की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बरसात के मौसम में पहले से ही खेतों की निगरानी मुश्किल है और इन जानवरों के लगातार हमलों ने किसानों की मेहनत को और ज्यादा प्रभावित किया है।

जिले के कई गांवों के बधार इलाकों में हर रोज सैकड़ों की संख्या में घोड़परास और हिरण देखे जा रहे हैं। किसान भरत चौबे, राज कपिल महतो, शिव बचन यादव, कपिल मुनि पांडेय और राघवेंद्र तिवारी ने बताया कि जब इनका झुंड किसी खेत में पहुंच जाता है तो वहां की फसल बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। धान के अलावा सब्जियों की खेती भी इनका मुख्य लक्ष्य बन गई है।

किसानों का कहना है कि चौबीसों घंटे खेत की रखवाली संभव नहीं है। इससे उनकी लागत और श्रम दोनों पर असर पड़ रहा है। फसल पकने के करीब पहुंचने पर इन झुंडों का आना और भी नुकसानदायक साबित हो रहा है। सब्जी उत्पादक किसान प्रेम कुमार महतो ने बताया कि तैयार फसल के समय घोड़परासों का खेतों में घुसना किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

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किसानों का आरोप है कि जिला प्रशासन और वन विभाग से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। घोड़परासों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है और कई गांवों में ये खुलेआम फसलों को नष्ट करते नजर आते हैं।

समस्या अब सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रही है। मुख्य सड़कों पर भी इनके झुंड अचानक पहुंच जाते हैं जिससे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा हो गया है। सड़क किनारे पेड़-पौधों की आड़ से अचानक सड़क पार करने वाले इन जानवरों के कारण कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और लोग घायल भी हुए हैं। कोरान सराय निवासी दयाशंकर तिवारी और अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह ने कहा कि यह मुद्दा अब किसानों के साथ आम लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ गया है।

स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन से वन विभाग के साथ मिलकर इस समस्या का समाधान निकालने की मांग की है ताकि किसानों की मेहनत सुरक्षित रहे और सड़कों पर यात्रा करने वालों की जान-माल की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।